श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 12: नित्यानंद प्रभु की महिमा  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  2.12.21 
চৈতন্যের রসে নিত্যানন্দ মহামতি
যে বলেন, যে করেন—সর্বত্র সম্মতি
चैतन्येर रसे नित्यानन्द महामति
ये बलेन, ये करेन—सर्वत्र सम्मति
 
 
अनुवाद
परम उदार नित्यानन्द भगवान चैतन्य के परम प्रेम में लीन रहते हैं, अतः वे जो कुछ भी बोलते या करते हैं, भगवान उसे सदैव स्वीकार करते हैं।
 
The most generous Nityananda is absorbed in the supreme love of Lord Caitanya, so whatever he says or does, the Lord always accepts it.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)