श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 12: नित्यानंद प्रभु की महिमा  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  2.12.10 
এই-মত আর কত অচিন্ত্য কথন
অনন্ত-মুখেতে নারি করিতে বর্ণন
एइ-मत आर कत अचिन्त्य कथन
अनन्त-मुखेते नारि करिते वर्णन
 
 
अनुवाद
इस प्रकार नित्यानंद ने और भी बहुत सी अकल्पनीय लीलाएँ कीं। यदि मेरे पास असंख्य मुख भी होते, तो भी मैं उन सबका वर्णन नहीं कर सकता।
 
In this way, Nityananda performed many other unimaginable pastimes. Even if I had countless mouths, I would not be able to describe them all.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)