श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 11: नित्यानंद का चरित  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  2.11.41 
সবার হৃদযে নিত্যানন্দের বসতি
তার আজ্ঞা লঙ্ঘিবেক কাহার শকতি?
सबार हृदये नित्यानन्देर वसति
तार आज्ञा लङ्घिबेक काहार शकति?
 
 
अनुवाद
भगवान नित्यानंद सबके हृदय में निवास करते हैं, अतः उनकी आज्ञा का उल्लंघन करने की शक्ति किसमें है?
 
Lord Nityananda resides in everyone's heart, so who has the power to disobey His orders?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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