vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 11: नित्यानंद का चरित
»
श्लोक 27
श्लोक
2.11.27
আপনে ধরিযা প্রভু পরায বসন
এ-মত অচিন্ত্য নিত্যানন্দের কথন
आपने धरिया प्रभु पराय वसन
ए-मत अचिन्त्य नित्यानन्देर कथन
अनुवाद
तब भगवान ने स्वयं नित्यानंद को पकड़ लिया और उन्हें वस्त्र पहनाए। नित्यानंद की लीलाएँ ऐसी अकल्पनीय हैं।
Then the Lord Himself took hold of Nityananda and clothed him. Nityananda's pastimes are unimaginable.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×