श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 11: नित्यानंद का चरित  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  2.11.27 
আপনে ধরিযা প্রভু পরায বসন
এ-মত অচিন্ত্য নিত্যানন্দের কথন
आपने धरिया प्रभु पराय वसन
ए-मत अचिन्त्य नित्यानन्देर कथन
 
 
अनुवाद
तब भगवान ने स्वयं नित्यानंद को पकड़ लिया और उन्हें वस्त्र पहनाए। नित्यानंद की लीलाएँ ऐसी अकल्पनीय हैं।
 
Then the Lord Himself took hold of Nityananda and clothed him. Nityananda's pastimes are unimaginable.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)