श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 11: नित्यानंद का चरित  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  2.11.25 
এখনি বলিলা তুমি—ঽআমি কি পাগল?ঽ
এই-ক্ষণে নিজ বাক্য ঘুচিল সকল”
एखनि बलिला तुमि—ऽआमि कि पागल?ऽ
एइ-क्षणे निज वाक्य घुचिल सकल”
 
 
अनुवाद
“थोड़ी देर पहले आपने पूछा था, ‘क्या मैं पागल हूँ?’ लेकिन अब आप अपने ही शब्दों का खंडन कर रहे हैं।”
 
“A little while ago you asked, ‘Am I crazy?’ But now you’re contradicting your own words.”
तात्पर्य
“हे नित्यानंद, अभी तो आप ही ने कहा था कि आप पागल नहीं हैं, और आपने फिर अपने वचन को तोड़ा, और अपने विरोधी तरीके से काम करके अपने कपड़े उतारे।”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)