“आपके चरणकमलों की पूजा करने वाले सेवकों के अवशेष ही मेरे भोजन बनें।
“May the remains of the servants who worship Your lotus feet become my food.
तात्पर्य
हरिदास ने कहा, ''मेरी केवल एक ही प्रर्थना है कि मैं श्री चैतन्य के उत्कृष्ट भक्तों के बचे-कुचे भोजन को खाकर अपना जीवन-निर्वाह कर सकूँ।'' चैतन्य चरितामृत (अंत्य 16.60) में कहा गया है:
''भक्त-पद-धूली आर भक्त-पद-जल
भक्त-भुक्ता-अवशेष - तिना महा-बल''
''एक भक्त के चरणों की धूली, चरणों को धोने वाला जल और एक भक्त द्वारा बचा हुआ भोजन ये तीन बहुत ही शक्तिशाली पदार्थ हैं।''
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥