श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  2.10.66 
স্মরণ-প্রভাবে বস্ত্র হৈল অনন্ত
তথাপিহ না জানিল সে সব দুরন্ত
स्मरण-प्रभावे वस्त्र हैल अनन्त
तथापिह ना जानिल से सब दुरन्त
 
 
अनुवाद
“उसकी याद के फलस्वरूप कपड़ा असीमित हो गया, फिर भी उन दुष्टों को समझ में नहीं आया कि ऐसा क्यों हुआ।
 
“As a result of his memory, the cloth became limitless, yet those evil people did not understand why this happened.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)