श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  2.10.50 
হেন কৃষ্ণ-ভক্ত-নামে না পায সন্তোষ
সেই সব পাপীরে লাগিল দৈব-দোষ
हेन कृष्ण-भक्त-नामे ना पाय सन्तोष
सेइ सब पापीरे लागिल दैव-दोष
 
 
अनुवाद
जो कोई भी कृष्ण के ऐसे भक्तों का नाम सुनकर प्रसन्न नहीं होता, वह पापी है और विधाता के नियमों द्वारा शापित है।
 
Anyone who does not feel happy on hearing the names of such devotees of Krishna is a sinner and cursed by the laws of the Creator.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)