“सुनो, हरिदास! जब यवनों ने तुम्हें विभिन्न गाँवों में हराया, तो मैंने तुम्हारा संकट देखा और सबको टुकड़े-टुकड़े करने के लिए हाथ में चक्र लेकर वैकुंठ से अवतरित हुआ।
"Listen, Haridasa! When the Yavanas defeated you in various villages, I saw your distress and descended from Vaikuntha with my discus in hand to cut them all to pieces.
तात्पर्य
भगवान की इच्छा से इस भौतिक जगत में विविध नियम प्रचलित हैं। निष्कामी कर्मी ईश्वर के उन नियमों का ही वर्णन करते हैं। सांसारिक सुख-दुख या कर्मफल को भोगने को बाध्य व्यक्तियों के पुरस्कार और दंड ईश्वर के सामान्य नियमों द्वारा निर्देशित होते हैं। लेकिन प्रभु के भक्तों से ईर्ष्या करने वाले व्यक्तियों द्वारा किए गए अपराधों की गंभीरता इतनी अधिक और सामान्य नियमों से परे है कि स्वयं परम प्रभु उनका निर्णय करते हैं। इस संबंध में श्रीमद् भागवत के नौवें सर्ग में वर्णित महाराजा अम्बरीष के विषयों पर चर्चा की जानी चाहिए।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥