श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन  »  श्लोक 320
 
 
श्लोक  2.10.320 
যার যার সঙ্গে তুমি করিলা বিহার
সে সব গোষ্ঠীর পাযে মোর নমস্কার
यार यार सङ्गे तुमि करिला विहार
से सब गोष्ठीर पाये मोर नमस्कार
 
 
अनुवाद
मैं उन लोगों के चरणों में सादर प्रणाम करता हूँ जिनके साथ आपने लीला का आनंद लिया।
 
I offer my respectful obeisances at the feet of those with whom you enjoyed the pastimes.
तात्पर्य
हे गौराचंद्र, मैं उन वैष्णवों के चरणों में नमन करता हूँ जिन्होंने आपकी संगति की खुशी प्राप्त की और जो आपकी सेवा में संलग्न होकर गौरवशाली बने।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)