श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन  »  श्लोक 314
 
 
श्लोक  2.10.314 
মধ্য-খণ্ড-কথা যেন অমৃতের খণ্ড
মহা-নিম্ব-হেন বাসে যতেক পাষণ্ড
मध्य-खण्ड-कथा येन अमृतेर खण्ड
महा-निम्ब-हेन वासे यतेक पाषण्ड
 
 
अनुवाद
मध्यखण्ड के विषय अमृत के समान हैं, फिर भी नास्तिक उन्हें निम्ब के समान कटु मानते हैं।
 
The topics of the middle section are like nectar, yet atheists consider them as bitter as lemon.
तात्पर्य
श्री चैतन्य के मध्य लीलाओं के विषय अमृत के समान हैं। पर जो मूर्ख सम्यक् देवताओं को नारायण के समान समझते हैं, वे इस अमृत को नीम से भी कड़वा समझते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)