আদি-দেব মহাযোগী ঈশ্বর বৈষ্ণব
মহিমার অন্ত ইঙ্হা না জানযে সব
आदि-देव महायोगी ईश्वर वैष्णव
महिमार अन्त इङ्हा ना जानये सब
अनुवाद
यहाँ तक कि आदि भगवान, महान योगी, नियन्ता तथा सर्वोच्च वैष्णव भी नित्यानन्द की महिमा की सीमा नहीं जानते।
Even the Primordial Lord, the great yogi, the controller and the supreme Vaishnava do not know the limits of the glory of Nityananda.
तात्पर्य
हालांकि महा-योगी आदिदेव महादेव (शिव) एक वैष्णव हैं, लेकिन उन्हें पूरी तरह से बलराम की गोपनीय गौरवों का ज्ञान नहीं है। कुछ लोग कहते हैं कि इस श्लोक का अर्थ है कि हर कोई सर्वोपरि वैष्णव महादेव के गौरव की सीमा को नहीं जानता है। अन्यथा, भगवान नित्यानंद स्वयं वैभव-तत्व के मूल स्रोत हैं, या अवतार में विहार करते हैं। इसलिए वह आदिदेव हैं, मूल भगवान। चूँकि वह कृष्ण की सेवा में दस अलग-अलग रूपों में लगे हुए हैं और किसी अन्य गतिविधि में शामिल नहीं हैं, इसलिए उन्हें सर्वोच्च आत्म-नियंत्रित के रूप में जाना जाता है। चूँकि वह कारणोदकशायी विष्णु, गर्भोदकशायी विष्णु और क्षीरोदकशायी विष्णु के स्रोत हैं, इसलिए वह सर्वोच्च नियंत्रक हैं। चूँकि वह कृष्ण के भक्त हैं, इसलिए वह एक वैष्णव हैं। कोई भी नित्यानंद के गौरव की अंतिम सीमा को समझने में सक्षम नहीं है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥