श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन  »  श्लोक 309
 
 
श्लोक  2.10.309 
সর্ব বৈষ্ণবের প্রিয নিত্যানন্দ-রায
সবে নিত্যানন্দ-স্থানে ভক্তি-পদ পায
सर्व वैष्णवेर प्रिय नित्यानन्द-राय
सबे नित्यानन्द-स्थाने भक्ति-पद पाय
 
 
अनुवाद
भगवान नित्यानन्द सभी वैष्णवों को प्रिय हैं, क्योंकि उनकी कृपा से ही वे भक्ति की अवस्था को प्राप्त करते हैं।
 
Lord Nityananda is dear to all Vaishnavas, because it is by His grace that they attain the state of devotion.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)