श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन  »  श्लोक 305
 
 
श्लोक  2.10.305 
ধরণী-ধরেন্দ্র নিত্যানন্দের চরণ
দেহঽ প্রভু গৌরচন্দ্র আমারে শরণ
धरणी-धरेन्द्र नित्यानन्देर चरण
देहऽ प्रभु गौरचन्द्र आमारे शरण
 
 
अनुवाद
हे भगवान गौरचन्द्र, कृपया मुझे नित्यानंद प्रभु के चरण कमलों की सेवा करने की अनुमति दीजिए, जो अनंत शेष के रूप में सभी ब्रह्मांडों को अपने सिर पर धारण करते हैं।
 
O Lord Gaurachandra, please allow me to serve the lotus feet of Nityananda Prabhu, who holds all the universes on His head as Ananta Sesha.
तात्पर्य
शेषशायी बलराम श्री नित्यानंद-बलराम के पूर्णांश हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)