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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन
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श्लोक 302
श्लोक
2.10.302
নিত্যানন্দ কহে,—ঽমুঞি চৈতন্যের দাসঽ
অহর্নিশ আর প্রভু না করে প্রকাশ
नित्यानन्द कहे,—ऽमुञि चैतन्येर दासऽ
अहर्निश आर प्रभु ना करे प्रकाश
अनुवाद
नित्यानंद ने घोषणा की, “मैं भगवान चैतन्य का सेवक हूँ।” दिन हो या रात, उन्होंने इसके विपरीत कुछ नहीं कहा।
Nityananda declared, “I am a servant of Lord Chaitanya.” Day or night, he said nothing to the contrary.
तात्पर्य
नीत्यानंद की संवैधानिक पहचान में सेवा के अतिरिक्त और कुछ प्रकट नहीं होता।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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