श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन  »  श्लोक 301
 
 
श्लोक  2.10.301 
ঽচৈতন্যের ভক্তঽ হেন—নাহি যার নাম
যদি সেব্য বস্তু,—তবু তৃণের সমান
ऽचैतन्येर भक्तऽ हेन—नाहि यार नाम
यदि सेव्य वस्तु,—तबु तृणेर समान
 
 
अनुवाद
यदि किसी व्यक्ति को भगवान चैतन्य का भक्त नहीं माना जाता है, तो भले ही वह कितना भी महान क्यों न हो, वह तिनके से भी अधिक श्रेष्ठ नहीं है।
 
If a person is not considered a devotee of Lord Chaitanya, then no matter how great he may be, he is no better than a straw.
तात्पर्य
यदि कोई व्यक्ति भगवान चैतन्य की सेवा से वंचित है, तो वह कितना भी महान हो, वह कभी सम्मान की आज्ञा नहीं दे सकता। केवल श्री चैतन्य के भक्त ही सबसे अधिक सम्माननीय होते हैं, चाहे वे इस दुनिया में कितने भी अपमानजनक क्यों न हों।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)