श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  2.10.3 
প্রভু বলে,—“আচার্য! মাগহ নিজ কার্য”
“যে মাগিলুঙ্, তাঽ পাইলুঙ্” বলযে আচার্য
प्रभु बले,—“आचार्य! मागह निज कार्य”
“ये मागिलुङ्, ताऽ पाइलुङ्” बलये आचार्य
 
 
अनुवाद
भगवान ने कहा, "हे आचार्य, जो आपकी इच्छा हो, वह मांग लीजिए।" अद्वैत आचार्य ने उत्तर दिया, "मैंने जो मांगा था, वह मुझे पहले ही मिल चुका है।"
 
The Lord said, "O Acharya, ask for whatever you wish." Advaita Acharya replied, "Whatever I asked for, I have already received it."
तात्पर्य
जब महाप्रभु ने अद्वैत आचार्य से उनकी चिर अभिलाषा माँगने को कहा, तब अद्वैत प्रभु ने कहा, "मुझे वह सब कुछ प्राप्त हो गया है जिसके लिए मैंने प्रार्थना की थी।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)