श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन  »  श्लोक 29-30
 
 
श्लोक  2.10.29-30 
ঠাকুর চৈতন্য বলে,—“শুন সর্ব-জন
সকৃত্ মুরারি-নিন্দা করে যেই-জন
কোটি-গঙ্গা-স্নানে তাঽর নাহিক নিস্তার
গঙ্গা-হরি-নামে তারে করিব সṁহার
ठाकुर चैतन्य बले,—“शुन सर्व-जन
सकृत् मुरारि-निन्दा करे येइ-जन
कोटि-गङ्गा-स्नाने ताऽर नाहिक निस्तार
गङ्गा-हरि-नामे तारे करिब सꣳहार
 
 
अनुवाद
भगवान चैतन्य ने कहा, "सुनो, जो कोई भी मुरारी की निन्दा करता है, उसे गंगा में लाखों बार स्नान करने पर भी मुक्ति नहीं मिलेगी। न तो गंगा और न ही हरि के पवित्र नाम उसके पापों को नष्ट कर सकते हैं।"
 
Lord Chaitanya said, "Listen, anyone who slanders Murari will not attain liberation even if he bathes millions of times in the Ganges. Neither the Ganges nor the holy names of Hari can destroy his sins."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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