মুরারি-গুপ্তের দাসে যে প্রসাদ পাইল
কেহ মাথা মুডাইযা তাহা না দেখিল
ধনে, কুলে, পাণ্ডিত্যে চৈতন্য নাহি পাই
কেবল ভক্তির বশ চৈতন্য গোসাঞি
मुरारि-गुप्तेर दासे ये प्रसाद पाइल
केह माथा मुडाइया ताहा ना देखिल
धने, कुले, पाण्डित्ये चैतन्य नाहि पाइ
केवल भक्तिर वश चैतन्य गोसाञि
अनुवाद
मुरारीगुप्त के सेवकों को जो कृपा प्राप्त हुई, वह सिर मुँड़ाने से नहीं देखी जा सकती थी। धन, उच्च कुल या विद्वत्ता से भगवान चैतन्य की कृपा प्राप्त नहीं की जा सकती, क्योंकि भगवान केवल भक्ति से ही वश में होते हैं।
The grace bestowed upon Murarigupta's servants could not be seen by shaving their heads. Wealth, high lineage, or scholarship cannot secure Lord Chaitanya's grace, for the Lord can only be controlled by devotion.
तात्पर्य
जो व्यक्ति प्रायश्चित आदि कार्यों में लगे थे या अपने सिर मुंडाते थे, ब्रह्मचारी और सन्यासी जो अपने बाल लंबे रखते थे, वे मुरारी गुप्त के सेवकों को मिली भगवान की कृपा नहीं पा सके, भले ही उन्होंने ऐसी विनम्रता और मितव्ययता नहीं दिखाई। बहुत से लोग सोचते हैं कि सबसे अमीर आदमी सबसे बड़ा वैष्णव होता है। कुछ लोग सोचते हैं कि अगर कोई कुलीन परिवार में जन्म लेता है, तो वह श्री चैतन्य की कृपा प्राप्त कर सकता है। फिर भी अन्य लोग सोचते हैं कि अगर कोई शास्त्रों में प्रवीणता हासिल कर लेता है, तो वह श्री चैतन्यदेव को नियंत्रित कर सकता है। लेकिन श्री चैतन्यदेव ऐसी सांसारिक महिमाओं से कभी बंधे या नियंत्रित नहीं होते हैं। हालाँकि, भक्त अपनी निष्ठा भक्ति के द्वारा प्रेम से श्री चैतन्यदेव को नियंत्रित करते हैं, भले ही उनमें ऐसी महिमाएँ न हों।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥