श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन  »  श्लोक 261
 
 
श्लोक  2.10.261 
মুকুন্দেরে এত যদি বর দান কৈল
মহা জয-জয-ধ্বনি তখনি হৈল
मुकुन्देरे एत यदि वर दान कैल
महा जय-जय-ध्वनि तखनि हैल
 
 
अनुवाद
जब भगवान ने मुकुन्द को यह आशीर्वाद दिया तो सर्वत्र हर्ष की ध्वनि गूंज उठी।
 
When God gave this blessing to Mukunda, sounds of joy echoed everywhere.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)