श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन  »  श्लोक 257
 
 
श्लोक  2.10.257 
ভক্তি বিলাইমু মুই—বলিল তোমারে
আগে প্রেম-ভক্তি দিল তোর কণ্ঠ-স্বরে
भक्ति विलाइमु मुइ—बलिल तोमारे
आगे प्रेम-भक्ति दिल तोर कण्ठ-स्वरे
 
 
अनुवाद
"मैं तुमसे कहता हूँ कि मैं भक्ति-सेवा बाँटूँगा। मैंने तुम्हारी वाणी में प्रेम और भक्ति पहले ही भर दी है।"
 
"I tell you that I will distribute devotional service. I have already filled your speech with love and devotion."
तात्पर्य
कोई भी जीव अपनी झूठी अहंता के माध्यम से परमेश्वर की सेवा में नहीं लग सकता है। जीवों के परमेश्वर की सेवा की ओर झुकाव के लिए मुख्य मापदंड परमेश्वर की कृपा है। महाप्रभु ने कहा, "हे मुकुंद, मैं तुम्हें प्रेममय भक्ति सेवा के योग्य बनाऊंगा। मैं निश्चित रूप से तुम्हारे कीर्तन के माध्यम से भक्ति सेवा का प्रचार करूंगा। "
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)