"हे मुकुंद, तुमने तो मेरे ही शब्द दुबारा कह दिए हैं। तुम मेरे अनन्य भक्त हो इसीलिए तुम्हारे मुख से कभी सत्य के सिवाय और कोई उक्ति नहीं निकल सकती।"