श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन  »  श्लोक 256
 
 
श्लोक  2.10.256 
যতেক কহিলা তুমি, সব মোর কথা
তোমার মুখেতে কেন আসিব অন্যথা?
यतेक कहिला तुमि, सब मोर कथा
तोमार मुखेते केन आसिब अन्यथा?
 
 
अनुवाद
"तुमने जो कुछ भी कहा है, वह मैंने ही कहा है। अन्यथा वे बातें तुम्हारे मुँह से कैसे निकलतीं?
 
"Whatever you said, I said it. Otherwise, how would those words come out of your mouth?
तात्पर्य
"हे मुकुंद, तुमने तो मेरे ही शब्द दुबारा कह दिए हैं। तुम मेरे अनन्य भक्त हो इसीलिए तुम्हारे मुख से कभी सत्य के सिवाय और कोई उक्ति नहीं निकल सकती।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)