মুকুন্দের খেদ দেখিঽ প্রভু বিশ্বম্ভর
লজ্জিত হৈযা কিছু করিলা উত্তর
मुकुन्देर खेद देखिऽ प्रभु विश्वम्भर
लज्जित हैया किछु करिला उत्तर
अनुवाद
मुकुन्द का विलाप देखकर भगवान विश्वम्भर कुछ लज्जित हुए और उनसे इस प्रकार बोले।
Seeing Mukunda's lamentation, Lord Vishvambhar felt a little ashamed and spoke to him thus.
तात्पर्य
मुकुंद एक स्वाभाविक भक्त थे। तथ्यत: वह अखंडित भक्ति सेवा के सेवक थे। इसलिए किसी व्यक्ति के लिए उनकी महिमाओं की सीमा का पता लगाना असंभव है। श्री मुकुंद की गिनती श्री चैतन्यदेव के प्रिय भक्तों में होती है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥