vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन
»
श्लोक 242
श्लोक
2.10.242
সহজে একান্ত ভক্ত,—কি কহিব সীমা?
চৈতন্য-প্রিযের মাঝে যাহার গণনা
सहजे एकान्त भक्त,—कि कहिब सीमा?
चैतन्य-प्रियेर माझे याहार गणना
अनुवाद
मुकुंद स्वभाव से ही अनन्य भक्त थे। मैं उनकी महिमा का वर्णन कैसे करूँ? वे भगवान चैतन्य के प्रिय पार्षदों में गिने जाते हैं।
Mukunda was by nature an exclusive devotee. How can I describe his greatness? He is counted among the beloved associates of Lord Chaitanya.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×