श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन  »  श्लोक 241
 
 
श्लोक  2.10.241 
বাহু তুলিঽ কাঙ্দযে মুকুন্দ মহাদাস
শরীর চলযে—হেন বাহে মহাশ্বাস
बाहु तुलिऽ काङ्दये मुकुन्द महादास
शरीर चलये—हेन बाहे महाश्वास
 
 
अनुवाद
महान सेवक मुकुंद ने अपनी बाहें ऊपर उठाईं और रो पड़ा। उसने इतनी ज़ोर से साँस ली कि उसका शरीर काँपने लगा।
 
Mukunda, the great servant, raised his arms and wept. He breathed so hard that his body trembled.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)