श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन  »  श्लोक 228
 
 
श्लोक  2.10.228 
হেন ভক্তি মোর ছার মুখে না মানিল
এ বড অদ্ভুত,—মুখ খসিঽ না পডিল
हेन भक्ति मोर छार मुखे ना मानिल
ए बड अद्भुत,—मुख खसिऽ ना पडिल
 
 
अनुवाद
"मुझे ऐसी भक्ति-सेवा की कोई परवाह नहीं थी, फिर भी मेरा सिर नहीं कटा। यह सचमुच आश्चर्यजनक है।"
 
"I had no regard for such devotional service, yet my head was not cut off. This is truly amazing."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)