श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन  »  श्लोक 217
 
 
श्लोक  2.10.217 
দেখিযা ও সবṁশে মরিল দুর্যোধন
না পাইল সুখ, ভক্তি-শূন্যের কারণ
देखिया ओ सवꣳशे मरिल दुर्योधन
ना पाइल सुख, भक्ति-शून्येर कारण
 
 
अनुवाद
"फिर भी भगवान के विराट रूप का दर्शन करने के बाद भी दुर्योधन अपने परिवार सहित मारा गया। भक्ति से रहित होने के कारण उसे कोई सुख नहीं मिला।
 
"Yet even after seeing the cosmic form of the Lord, Duryodhana was killed along with his family. Being devoid of devotion, he did not find any happiness.
तात्पर्य
जो व्यक्ति भौतिक अवधारणाओं में लिप्त हैं, वे इस भौतिक दुनिया को प्रभु का अस्थायी सार्वभौमिक रूप मानते हैं। यद्यपि, भौतिक ज्ञान में संपन्न दुर्योधन ने भगवान के इस तरह के सार्वभौमिक रूप को देखा, लेकिन उसका वध उसके परिवार के साथ इसलिए हुआ क्योंकि प्रभु के वास्तविक रूप को देखने से उसे वंचित कर दिया गया था। हालाँकि, अपनी धार्मिकता के कारण दुर्योधन ने भगवान को भगवान की बाहरी ऊर्जा द्वारा निर्मित भौतिक दुनिया में देखा, क्योंकि उसने भगवान के वास्तविक रूप को नहीं देखा, बल्कि भगवान को भौतिक माना, वह भगवान की सेवा की ओर झुकाव नहीं रख पाया। इसीलिए दुर्योधन के लिए कोई भी भक्तिमय खुशी प्राप्त करना असंभव था। बल्कि, चूँकि वह भगवान की सेवा से विमुख था, इसलिए उसे दंड के निशान के रूप में उसके परिवार के साथ नष्ट कर दिया गया।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)