श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन  »  श्लोक 214
 
 
श्लोक  2.10.214 
প্রভুর আশ্বাস শুনিঽ কান্দযে মুকুন্দ
ধিক্কার করিযা আপনারে বলে মন্দ
प्रभुर आश्वास शुनिऽ कान्दये मुकुन्द
धिक्कार करिया आपनारे बले मन्द
 
 
अनुवाद
भगवान के सांत्वना भरे शब्द सुनकर मुकुन्द बहुत रोया, उसने विलाप किया और अपने आप को दोषी ठहराया।
 
Hearing the Lord's comforting words, Mukunda wept profusely, lamented, and blamed himself.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)