श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन  »  श्लोक 213
 
 
श्लोक  2.10.213 
ভক্তি-ময তোমার শরীর—মোর দাস
তোমার জিহ্বায মোর নিরন্তর বাস”
भक्ति-मय तोमार शरीर—मोर दास
तोमार जिह्वाय मोर निरन्तर वास”
 
 
अनुवाद
"तुम मेरे दास हो और तुम्हारा शरीर भक्ति से परिपूर्ण है। मैं तुम्हारी जिह्वा पर निरंतर निवास करता हूँ।"
 
"You are my slave and your body is full of devotion. I reside constantly on your tongue."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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