श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन  »  श्लोक 205
 
 
श्लोक  2.10.205 
প্রভু বলে,—“মুকুন্দ, ঘুচিল অপরাধ
আইস, আমারে দেখ, ধরহ প্রসাদ”
प्रभु बले,—“मुकुन्द, घुचिल अपराध
आइस, आमारे देख, धरह प्रसाद”
 
 
अनुवाद
भगवान ने कहा, "हे मुकुन्द, तुम अपने अपराधों से मुक्त हो गए हो। आओ और मेरे दर्शन करो और मेरी दया पाओ।"
 
The Lord said, "O Mukunda, you are freed from your crimes. Come and see me and receive my mercy."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)