| श्री चैतन्य भागवत » खण्ड 2: मध्य-खण्ड » अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन » श्लोक 204 |
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| | | | श्लोक 2.10.204  | সকল বৈষ্ণব ডাকে “আইসহ মুকুন্দ”
না জানে মুকুন্দ কিছু পাইযা আনন্দ | सकल वैष्णव डाके “आइसह मुकुन्द”
ना जाने मुकुन्द किछु पाइया आनन्द | | | | | | अनुवाद | | सभी वैष्णवों ने पुकारा, “आओ, मुकुंद”, लेकिन मुकुंद इतना प्रसन्न था कि उसे पता ही नहीं चला कि क्या हो रहा है। | | | | All the Vaishnavas called out, “Come, Mukunda,” but Mukunda was so happy that he did not realize what was happening. | |
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