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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन
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श्लोक 193
श्लोक
2.10.193
মুকুন্দ শুনযে সব বাহিরে থাকিযানা
পাইব দরশন—শুনিলেন ইহা
मुकुन्द शुनये सब बाहिरे थाकियाना
पाइब दरशन—शुनिलेन इहा
अनुवाद
मुकुंद ने बाहर से सारी बातें सुन लीं। उसने सुना कि उसे भगवान के दर्शन नहीं होंगे।
Mukunda overheard everything from outside. He heard that he would not get to see God.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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