श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन  »  श्लोक 190
 
 
श्लोक  2.10.190 
অন্য সম্প্রদাযে গিযা যখন সাম্ভায
নাহি মানে ভক্তি, জাঠি মারযে সদায
अन्य सम्प्रदाये गिया यखन साम्भाय
नाहि माने भक्ति, जाठि मारये सदाय
 
 
अनुवाद
“जब वह किसी अन्य संप्रदाय में सम्मिलित होता है, तो वह भक्ति स्वीकार न करके निरंतर मुझे डंडे से पीटता है।
 
“When he joins another sect, he constantly beats me with a stick, refusing to accept devotion.
तात्पर्य
"जब मुकुंद मायावादियों में शामिल होते हैं, तो वह भक्ति सेवा की अनंतता को अस्वीकार करते हैं और तर्क की लड़ाई में भक्तों पर आक्रमण करते हैं।" साम्भाय शब्द का अर्थ है "प्रवेश करना"। अन्य सम्प्रदाय वाक्यांश का तात्पर्य मायावाद-सम्प्रदाय से है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)