श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  2.10.18 
শুষ্ক কাষ্ঠ দ্রবে শুনিঽ গুপ্তের ক্রন্দন
বিশেষে দ্রবিলা সব ভাগবত-গণ
शुष्क काष्ठ द्रवे शुनिऽ गुप्तेर क्रन्दन
विशेषे द्रविला सब भागवत-गण
 
 
अनुवाद
मुरारी गुप्त की पुकार सुनकर सूखी लकड़ी भी पिघल गई, और भक्तों के हृदय विशेष रूप से पिघल गए।
 
Even dry wood melted upon hearing Murari Gupta's call, and the hearts of the devotees especially melted.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)