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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन
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श्लोक 178
श्लोक
2.10.178
শ্রীবাস বলেন,—“শুন জগতের নাথ
মুকুন্দ কি অপরাধ করিল তোমাত?
श्रीवास बलेन,—“शुन जगतेर नाथ
मुकुन्द कि अपराध करिल तोमात?
अनुवाद
श्रीवास बोले, "हे जगत के स्वामी, कृपया सुनिए। मुकुंद ने आपको किस प्रकार अपमानित किया है?"
Srivasa said, "O Lord of the universe, please listen. How has Mukunda insulted you?"
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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