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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन
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श्लोक 177
श्लोक
2.10.177
ঠাকুরেহ নাহি ডাকে, আসিতে না পারে
দেখিযা জন্মিল দুঃখ সবার অন্তরে
ठाकुरेह नाहि डाके, आसिते ना पारे
देखिया जन्मिल दुःख सबार अन्तरे
अनुवाद
प्रभु ने उसे बुलाया नहीं, इसलिए वह नहीं आ सका। यह देखकर सभी को दुःख हुआ।
The Lord did not call him, so he could not come. This saddened everyone.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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