श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन  »  श्लोक 165
 
 
श्लोक  2.10.165 
অদ্বৈতের শ্রী-মুখের এ সকল কথাইহাতে
সন্দেহ কিছু না কর সর্বথা
अद्वैतेर श्री-मुखेर ए सकल कथाइहाते
सन्देह किछु ना कर सर्वथा
 
 
अनुवाद
ये सभी कथन अद्वैत के ही मुख से निकले हैं, इसलिए इस संबंध में किसी को भी कोई संदेह नहीं होना चाहिए।
 
All these statements have come from the mouth of Advaita himself, hence no one should have any doubt in this regard.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)