श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन  »  श्लोक 160
 
 
श्लोक  2.10.160 
চৈতন্য স্মরণ করিঽ আচার্য গোসাঞি
নিরবধি কান্দে, আর কিছু স্মৃতি নাই
चैतन्य स्मरण करिऽ आचार्य गोसाञि
निरवधि कान्दे, आर किछु स्मृति नाइ
 
 
अनुवाद
भगवान चैतन्य के चरण कमलों का स्मरण करते हुए आचार्य गोसाणी निरंतर रोते रहे और बाकी सब कुछ भूल गए।
 
Acharya Gosani wept continuously, remembering the lotus feet of Lord Chaitanya and forgot everything else.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)