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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन
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श्लोक 143
श्लोक
2.10.143
এই-মত অদ্বৈতের কিছু দোষ নাঞি
ভাগ্যাভাগ্য বুঝিঽ ব্যাখ্যা করে সেই ঠাঞি
एइ-मत अद्वैतेर किछु दोष नाञि
भाग्याभाग्य बुझिऽ व्याख्या करे सेइ ठाञि
अनुवाद
इस प्रकार अद्वैत आचार्य में कोई दोष नहीं है। लोगों ने उनकी व्याख्याओं को अपनी-अपनी धर्मपरायणता या अधर्म के अनुसार समझा।
Thus, Advaita Acharya has no flaws. People have interpreted his explanations according to their own righteousness or unrighteousness.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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