श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन  »  श्लोक 141
 
 
श्लोक  2.10.141 
শরতের মেঘ যেন পরভাগ্যে বর্ষে
সর্বত্র না করে বৃষ্টি, কোথাহ বরিষে
शरतेर मेघ येन परभाग्ये वर्षे
सर्वत्र ना करे वृष्टि, कोथाह वरिषे
 
 
अनुवाद
शरद ऋतु के बादल हर जगह नहीं बरसते, बल्कि कुछ भाग्यशाली स्थानों पर ही बरसते हैं।
 
Autumn clouds do not rain everywhere, but only in some lucky places.
तात्पर्य
शरद ऋतु में सभी जगह एक साथ वर्षा नहीं होती है। कहीं वर्षा होती है और कहीं नहीं होती। शरद ऋतु में भाग्यशाली जगहों पर वर्षा होने की अपेक्षा रहती है। अद्वैता प्रभु के कथनों से भी कुछ व्यक्तियों को सौभाग्य प्राप्त हुआ तो कुछ दूसरों के लिए दुर्भाग्य भी बना।

श्री कृष्ण और बलराम के श्रीधाम वृंदावन में वर्षा और शरद ऋतु में होने वाले व्रज लीलाओं का वर्णन करते हुए श्री शुकदेव जी इस प्रकार बोले- [अगला श्लोक]

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)