श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन  »  श्लोक 140
 
 
श्लोक  2.10.140 
অদ্বৈতের বাক্য বুঝিবার শক্তি কার?
জানিহ, ঈশ্বর-সঙ্গে ভেদ নাহি যাঽর
अद्वैतेर वाक्य बुझिबार शक्ति कार?
जानिह, ईश्वर-सङ्गे भेद नाहि याऽर
 
 
अनुवाद
अद्वैत के कथनों को कौन समझ सकता है? निश्चय जान लो कि वह परमेश्वर से अभिन्न है।
 
Who can understand the statements of Advaita? Know for certain that He is one with the Supreme Lord.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)