श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन  »  श्लोक 135
 
 
श्लोक  2.10.135 
অদ্বৈত বলযে,—“আর কি বলিব মুঞি
এই মোর মহত্ত্ব যে মোর নাথ তুঞি”
अद्वैत बलये,—“आर कि बलिब मुञि
एइ मोर महत्त्व ये मोर नाथ तुञि”
 
 
अनुवाद
अद्वैत ने कहा, "मैं और क्या कह सकता हूँ? आपको अपना गुरु पाकर मैं गौरवान्वित हूँ।"
 
Advaita said, "What more can I say? I am honored to have you as my guru."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)