श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन  »  श्लोक 134
 
 
श्लोक  2.10.134 
শুনিযা আচার্য প্রেমে কান্দিতে লাগিলাপাইযা
মনের কথা মহানন্দে ভোলা
शुनिया आचार्य प्रेमे कान्दिते लागिलापाइया
मनेर कथा महानन्दे भोला
 
 
अनुवाद
भगवान की व्याख्या सुनकर अद्वैत आचार्य प्रेम से भावविभोर होकर रोने लगे। वे जो बातें सुनना चाहते थे, उन्हें सुनकर वे आनंद में अपने को भूल गए।
 
Hearing the Lord's explanation, Advaita Acharya was overcome with love and wept. He lost himself in the joy of hearing what he longed to hear.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)