vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री चैतन्य भागवत
»
खण्ड 2: मध्य-खण्ड
»
अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन
»
श्लोक 131
श्लोक
2.10.131
সর্বতঃ পাণি-পাদṁ তত্ সর্বতো ঽক্ষি-শিরো-মুখম্
সর্বতঃশ্রুতিমল্ লোকে সর্বম্ আবৃত্য তিষ্ঠতি
सर्वतः पाणि-पादꣳ तत् सर्वतो ऽक्षि-शिरो-मुखम्
सर्वतःश्रुतिमल् लोके सर्वम् आवृत्य तिष्ठति
अनुवाद
"उसके हाथ-पैर, आँखें, सिर और मुख सर्वत्र हैं, और उसके कान सर्वत्र हैं। इस प्रकार परमात्मा सर्वत्र व्याप्त है।"
"His hands, feet, eyes, head and mouth are everywhere, and His ears are everywhere. Thus God is omnipresent."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×