श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन  »  श्लोक 127
 
 
श्लोक  2.10.127 
ধন্য ধন্য অদ্বৈতের ভক্তির মহিমা
ভক্তি-শক্তি কি বলিব?—এই তার সীমা
धन्य धन्य अद्वैतेर भक्तिर महिमा
भक्ति-शक्ति कि बलिब?—एइ तार सीमा
 
 
अनुवाद
अद्वैत की भक्ति की महिमा अत्यन्त अद्भुत है। मैं उनकी भक्ति शक्ति का वर्णन कैसे कर सकता हूँ?
 
The glory of Advaita's devotion is absolutely amazing. How can I describe the power of his devotion?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)