श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन  »  श्लोक 126
 
 
श्लोक  2.10.126 
যত রাত্রি স্বপ্ন হয, যে দিনে, যে-ক্ষণে
যত শ্লোক,—সব প্রভু কহিলা আপনে
यत रात्रि स्वप्न हय, ये दिने, ये-क्षणे
यत श्लोक,—सब प्रभु कहिला आपने
 
 
अनुवाद
भगवान ने अद्वैत को उन सभी स्वप्नों, दिनों, क्षणों और श्लोकों की याद दिलाई।
 
The Lord reminded Advaita of all those dreams, days, moments and verses.
तात्पर्य
महाप्रभु ने व्यक्तिगत रूप से अद्वैत प्रभु को उन सभी छंदों की याद दिलाई, जिनके बारे में पहले उन्हें कुछ संदेह थे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)