श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन  »  श्लोक 113
 
 
श्लोक  2.10.113 
বসিঽ আছে মহা-জ্যোতিঃ খট্টার উপরে
মহা-জ্যোতিঃ নিত্যানন্দ ছত্র ধরে শিরে
वसिऽ आछे महा-ज्योतिः खट्टार उपरे
महा-ज्योतिः नित्यानन्द छत्र धरे शिरे
 
 
अनुवाद
जब परम तेजस्वी भगवान सिंहासन पर बैठे, तब परम तेजस्वी नित्यानंद ने उनके सिर पर छत्र धारण किया।
 
When the Supremely radiant Lord sat on the throne, the Supremely radiant Nityananda held a canopy over His head.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)