श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 2: मध्य-खण्ड  »  अध्याय 10: भगवान के महाप्रकाश लीला का समापन  »  श्लोक 111
 
 
श्लोक  2.10.111 
প্রহ্লাদ যে-হেন দৈত্য, কপি হনুমান্
এই-মত হরিদাস ঽনীচ-জাতিঽ নাম
प्रह्लाद ये-हेन दैत्य, कपि हनुमान्
एइ-मत हरिदास ऽनीच-जातिऽ नाम
 
 
अनुवाद
जैसे प्रह्लाद का जन्म राक्षस परिवार में हुआ था और हनुमान का जन्म बंदर परिवार में हुआ था, उसी प्रकार हरिदास का जन्म एक “निम्न-वर्गीय परिवार” में हुआ था।
 
Just as Prahlad was born in a demon family and Hanuman was born in a monkey family, similarly Haridas was born in a “low-class family”.
तात्पर्य
प्रह्लाद, दैत्य हिरण्यकश्यपु का पुत्र था, इसलिए उसे देवता या धार्मिक व्यक्ति नहीं माना जाता है। हनुमान का जन्म एक पशु परिवार में हुआ था, इसलिए उसे भी सभ्य नहीं कहा जा सकता है। जैसे प्रह्लाद और हनुमान को सर्वश्रेष्ठ वैष्णव मानना सबसे आवश्यक है, वैसे ही ठाकुर हरिदास, जो एक निम्न वर्गीय गैर-हिंदू परिवार में पैदा हुए थे, को महाभागवत मानना भी सबसे आवश्यक है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)