|
| |
| |
श्लोक 2.1.93  |
আছাডের সমুচ্চয নাহিক শ্রী-অঙ্গে
না জানে ঠাকুর কিছু নিজ-প্রেম-রঙ্গে |
आछाडेर समुच्चय नाहिक श्री-अङ्गे
ना जाने ठाकुर किछु निज-प्रेम-रङ्गे |
| |
| |
| अनुवाद |
| भगवान बार-बार जोर से जमीन पर गिरे, लेकिन प्रेमोन्मत्त होने के कारण उन्हें कुछ भी महसूस नहीं हुआ। |
| |
| The Lord fell hard on the ground again and again, but being in ecstasy of love he did not feel anything. |
| ✨ ai-generated |
| |
|