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श्री चैतन्य भागवत
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खण्ड 2: मध्य-खण्ड
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अध्याय 1: भगवान के प्रतिष्ठान का प्रारंभ और कृष्ण-संकीर्तन पर निर्देश
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श्लोक 92
श्लोक
2.1.92
কৃষ্ণ-প্রেমে কান্দে প্রভু শচীর নন্দন
চতুর্-দিকে বেডি’ কান্দে ভাগবত-গণ
कृष्ण-प्रेमे कान्दे प्रभु शचीर नन्दन
चतुर्-दिके वेडि’ कान्दे भागवत-गण
अनुवाद
शचीपुत्र कृष्ण के प्रेम से रो पड़ा और भगवान के चारों ओर उपस्थित सभी भक्तगण भी जोर-जोर से रोने लगे।
Sachiputra wept with love for Krishna, and all the devotees gathered around the Lord also wept loudly.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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